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शोध

शोध

ललित कला अकादेमी, बतौर राष्ट्रीय कला संस्थान, भारत में दृश्यकलाओं के संवर्धन और संरक्षण हेतु कार्यरत है तथा कलात्मक विरासत और ज्ञान के शोध, प्रलेखन एवं प्रसार हेतु प्रतिबद्ध है। अकादेमी पूरे वर्ष प्रदर्शनियों, शैक्षणिक कार्यक्रमों, कला संगोष्ठियों और राष्ट्रीय महत्व की विविधतापूर्ण गतिविधियों का आयोजन करते हुए देश की सेवा करती आ रही है।

     अपने संघ-ज्ञापन के तहत, अकादेमी को पेन्टिंग, मूर्तिशिल्प, ग्राफिक्स, समकालीन, लोक, जनजातीय और पारम्परिक कलाओं, कला इतिहास, कला आलोचना व संबंधित विधाओं सहित दृश्य एवं सृजनात्मक कलाओं के क्षेत्र में शोध, अध्ययन, प्रलेखन को प्रोत्साहित करने का दायित्व दिया गया है।

 

शोध उद्देश्य

अकादेमी के शोध उद्देश्यों में शामिल हैं -:

  1. दृश्य कलाओं जैसे पेन्टिंग, मूर्तिशिल्प, ग्राफिक्स और संबद्ध दृश्यकलाओं के क्षेत्र में शोध और अध्ययन को प्रोत्साहित करना।
  2. अखिल भारतीय स्तर पर शोधार्थियों, शिक्षाविदों, राज्य अकादेमियों, क्षेत्रीय सांस्कृतिक केन्द्रों, विश्वविद्यालयों, कला स्कूलों और विद्यालयों, संग्रहालयों, दीर्घाओं, कला संघों को शामिल करके संगोष्ठियों, सम्मेलनों, प्रदर्शनियों, कार्यशालाओं और अन्य शैक्षणिक कार्यक्रमों के माध्यम से विभिन्न कला शैलियों के मध्य विचारों के आदान-प्रदान को सुलभ करना।
  3. लोक, जनजातीय व पारम्परिक कलाओं और शिल्प तकनीकों के अध्ययन, शोध, प्रलेखन और सर्वेक्षण को प्रोत्साहित करना; इन कला रूपों का संरक्षण व प्रक्षेपण; क्षेत्रीय सर्वेक्षणों का आयोजन; और विद्यमान देशज शिल्पियों, चित्रकारों, मूर्तिकारों और पारम्परिक कलाकारों को प्रोत्साहित करना।

 

शोध और ज्ञान-प्रसार के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के ही भाग के रूप में अकादेमी और इसके क्षेत्रीय केन्द्र नियमित रूप से दृश्यकला रूपों के विविध पक्षों पर व्याख्यानों, संगोष्ठियों, कार्यशालाओं और चर्चाओं का आयोजन करते हैं। इस तरह के प्रयासों से शोधार्थियों, छात्रों, कार्यरत कलाकारों और कला समर्थकों को लाभ मिलता है।

     अकादेमी, ललित कला व्याख्यान श्रृंखला का भी आयोजन करती है जिसमें विशिष्ट कलाकारों, शोधार्थियों और कला व संस्कृति क्षेत्र से जुड़े प्रख्यात व्यक्तियों द्वारा व्याख्यान दिए जाते हैं। यह व्याख्यान श्रृंखला समकालीन, लोक, जनजातीय और पारम्परिक दृश्यकला प्रयोगों पर सार्थक संवाद और बौद्धिक संविदा के लिए जीवंत मंच प्रदान करती है जिसमें कलाकारों, छात्रों, शोधार्थियों और कला पारखियों की प्रतिभागिता रहती है। यह व्याख्यान कलात्मक प्रक्रियाओं, सृजनात्मक प्रयोगों और आलोचनात्मक संलाप में बहूमूल्य अंतर्दृष्टि उपलब्ध करवाते हैं।

     ललित कला व्याख्यान श्रृंखला में दृश्यकलाओं के कई प्रख्यात कलाकारों और विशिष्ट व्यक्तियों यथा सिद्धार्थ, अर्पणा कौर, के.एस.राधाकृष्णन, आनंदमाँय बनर्जी और जगन्नाथ पांडा आदि ने अपनी उपस्थिति दर्ज करवाते हुए अपने कलात्मक अनुभवों, संदर्शों और दृश्यकलाओं के क्षेत्र में योगदान पर बात की।